सिद्धबली न्यूज डेस्क
कोटद्वार। बलभद्रपुर स्थित डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल कोटद्वार में उत्तराखंड के गांधी, समाज सुधारक एवं लोक संस्कृति के संवाहक स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी जी की जयंती बड़े धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाई गई ।विदित ही है कि श्री इंद्रमणि जी की जयंती 24 दिसंबर को हर वर्ष लोक संस्कृति दिवस के रूप में मनाई जाती है इसका कारण है कि बडोनी जी मूल रूप से संस्कृत कर्मी थे इसलिए ‘इंद्रमणि जी स्मृति मंच’ की यह मांग थी कि उनका जन्मदिन लोक संस्कृति दिवस के रूप में घोषित किया जाए। अतः यह दिवस स्थानीय संस्कृति को संरक्षित करने व विकसित करने हेतु मनाया जाता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्य नितिन भाटिया एवं शिक्षकों के द्वारा स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी जी के छायाचित्र का अनावरण, दीप प्रज्वलन तथा माल्यार्पण किया गया। इसके पश्चात रंगारंग कार्यक्रम की प्रस्तुतियों के साथ गढ़वाली भाषा में बडोनी जी की जीवनी व संघर्षों को दर्शाया गया। जिसके क्रम में कक्षा पांचवी के जय आदित्य ने गढ़वाली भाषा में भाषण प्रस्तुत कर उनके जीवन व कार्यों से अवगत कराया। तत्पश्चात श्रीमती रेनू बिष्ट, किरन अन्थवाल,लता रावत, अर्चना रावत, अनीता तोमर, हीना सडाना ,स्नेहलता कुकरेती, दिव्या नौटियाल, अनीता बिष्ट, शिल्पी पॉल,श्री आशीष नैथानी एवं सिद्धार्थ नैथानी के मार्गदर्शन में कक्षा चौथी, पांचवी, छठवीं व सातवीं के छात्र-छात्राओं के द्वारा जय हो इंद्रमणि बडोनी, ले भुजी जाला चूड़ा, ता छुमा ता ,हे नंदा विभिन्न गढ़वाली गीतों पर गढ़वाली लोक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गई । इसके बाद छात्र-छात्राओं ने स्वर्गीय बडोनी जी के जीवन के संघर्ष एवं कार्यों को दर्शाते हुए गढ़वाली भाषा में अत्यंत सुंदर नाटक प्रस्तुत किया। तत्पश्चात छात्र-छात्राओं ने ‘जय हो कुमाऊं जय हो गढ़वाल बोल’ पर सुंदर गढ़वाली समूह गान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन पारंपरिक भाषा में दिव्यांशी नेगी के द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के समापन पर प्रधानाचार्य श्री नितिन भाटिया ने बडोनी जी के अनुकरणीय जीवन को नमन करते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण व सांस्कृतिक धरोहर की सुरक्षा के लिए हम बडोनी जी के योगदान को भुला नहीं सकते l इसके साथ ही उन्होंने अपनी संस्कृति को हर संभव प्रयास से बढ़ावा देने पर जोर दिया।
इस अवसर पर समस्त स्टाफ मौजूद रहा।