अमेरिका होने जा रही प्रतिष्ठित 128वीं बोस्टन मैराथन में बनाया अपना स्थान
उत्तराखंड के एक छोटे से गांव में 1978 में जन्मी जयंती का बचपन शुरुआत से ही संघर्षमय रहा है। उनके पिता दिल्ली में क्लर्क के पद पर तैनात हैं। वह सात वर्ष की उम्र में ही अपने परिवार के साथ दिल्ली आ गई थी। जयंती अपने दो भाइयों की इकलौती बहन है। तीनों ही स्पोर्टस में रुचि रखते हैं। जयंती ने 12 वर्ष की उम्र में ही त्यागराज स्टेडियम जाना शुरू किया। 1993 में राष्ट्रीय स्कूल खेलों में हिस्सा लिया। 1994 में जूनियर नेशनल कैंप का हिस्सा रहीं। 1996 में सीनियर इंटर स्टेट में पीटी ऊषा, बीनामौल जैसी अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों के साथ खेलने का मौका मिला।
ट्रायल की तैयारी करते हुए हुई चोटिल, फिर भी नहीं मानी हार
1995 में जूनियर एशियन के ट्रायल की तैयारी करते हुए जयंती के पांव में कॉर्न हो गया था जिसका ऑपरेशन हुआ। उन्हें काफी समय तक ट्रायल से दूर रहना पड़ा। 2017 में चाइना एशियन मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए नहीं जा पाई। इलाज करवाया और फिर मैदान मे उतरी तथा एयरटेल दिल्ली हाफ मेराथन में अच्छे टाइमिंग के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया।