डी.ए.वी. कोटद्वार ने हर्षोल्लास से मनाया 38वाँ स्थापना दिवस

नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

सिद्धबली न्यूज डेस्क

कोटद्वार। बलभद्रपुर स्थित डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल कोटद्वार ने अपनी शैक्षिक यात्रा के 38वें स्थापना दिवस को उल्लास, उमंग और सांस्कृतिक वैभव के साथ मनाया। विद्यालय परिसर में आयोजित भव्य समारोह में नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने वातावरण को जीवंत बना दिया और सभी उपस्थित जनों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ हरिश्चंद्र शास्त्री के नेतृत्व में वैदिक परंपरा एवं मंगलाचरण हवन के साथ हुआ। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का अद्भुत प्रदर्शन करते हुए विविध रंगारंग प्रस्तुतियाँ दीं।

नर्सरी, एल.जी. एवं यू.के.जी. के नन्हे कलाकारों ने ‘जंगल थीम’ पर आधारित मनोहारी नृत्य प्रस्तुत कर प्रकृति और वन्यजीवन का मनमोहक संसार मंच पर साकार कर दिया। कक्षा प्रथम एवं द्वितीय के विद्यार्थियों ने अंग्रेजी गीत ‘ स्माइल आन योर फेस’ पर अपनी आकर्षक प्रस्तुति से दर्शकों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी।

कक्षा तृतीय एवं चतुर्थ के नन्हे-मुन्ने कलाकारों ने राजस्थानी लोक संस्कृति की मनोहारी छटा बिखेरते हुए ‘आया रे शुभ दिन आयो रे’ पर शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं कक्षा पाँचवीं के विद्यार्थियों ने ‘एक है ईश्वर, एक है वेद, एक ही अपना नारा’बोल पर मनमोहक नृत्य एवं ‘हो देव दयानंद’बोल पर समूहगान की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में उत्साह और ऊर्जा का संचार किया।

विशेष आकर्षण रहा यू.के.जी. के नन्हे कलाकार अद्विक तोमर का, जिन्होंने ‘मेरी सरोली’ बोल पर गढ़वाली गीत की मनोहारी प्रस्तुति देकर उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और लोकभाषा की सुगंध से पूरे वातावरण को सराबोर कर दिया। उनकी प्रस्तुति को उपस्थित दर्शकों ने करतल ध्वनि से सराहा।

इस अवसर पर विद्यालय के ए.आर.ओ.  पी.सी. पुरोहित ने समस्त विद्यालय परिवार को स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए विद्यालय की निरंतर प्रगति और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

समारोह के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य  नितिन भाटिया ने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं समस्त विद्यालय परिवार को 38वें स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि विद्यालय की गौरवशाली परंपराएँ, संस्कार और उत्कृष्ट शिक्षा ही उसकी सबसे बड़ी पहचान हैं। इस अवसर पर समस्त स्टाफ मौजूद रहा।

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