गोष्ठी में छात्र-छात्राओं को दी महिला दिवस के महत्व की जानकारी
सिद्धबली न्यूज डेस्क
कोटद्वार। इंस्टीट्यूट ऑफ हास्पीटेलिटी मैनजमैंट एंड साइंसेज (आईएचएमएस) में राष्ट्रीय महिला दिवस पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें महिला प्राध्यापकों और छात्राओं ने अपने अनुभव साझा किए।
संस्थान के सभागार में आयोजित गोष्ठी में कंप्यूटर साइंस विभागाध्यक्ष विजयश्री खुगशाल ने छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय महिला दिवस की महत्ता की जानकारी दी। उन्होंने कहा सरोजिनी नायडू भारत की प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी व कवयित्री हैं। उन्हें भारत कोकिला यानी नाइटिंगेल ऑफ इंडिया भी कहा जाता है। राष्ट्रीय महिला दिवस सरोजिनी नायडू को समर्पित है। सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हुआ था। वह बचपन से बुद्धिमान थीं। जब सरोजिनी नायडू 12 साल की थीं, तब से उन्हें कविताएं लिखनी शुरू कर दी थी। बाद में स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। देश की आजादी और महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। आजादी के बाद सरोजिनी नायडू को पहली महिला राज्यपाल बनने का भी मौका मिला। उनके कार्यों और महिलाओं के अधिकारों के लिए उनकी भूमिका को देखते हुए सरोजिनी नायडू के जन्मदिन के मौके पर राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। जब देश को 1947 में आजादी मिली तो उत्तर प्रदेश की राज्यपाल बनने का गौरव एक महिला को प्राप्त हुआ। वह महिला सरोजिनी नायडू थी। बाद में साल 2014 में सरोजिनी नायडू की जयंती को राष्ट्रीय महिला दिवस के तौर पर मनाने की शुरुआत की गई।
प्राध्यापक सपना रौथाण ने कहा कि आज अपनी कार्यकुशलता के कारण देश ही नहीं पूरे विश्व में महिलाओं ने अलग पहचान बनाई है। देश में घूंघट प्रथा से निकलकर आज महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रहीं हैं। उन्होंने छात्राओं को स्वावलंबी बनने की अपील की। प्राध्यापक ममता ने छात्रों से छात्राओं और महिलाओं का सम्मान करने की सीख दी।
इस अवसर पर संस्थान के जन संपर्क अधिकारी नरेश थपलियाल, प्राध्यापक सिद्धांत नौटियाल समेत सभी कर्मचारी मौजूद रहे।