“कला समेकन” विद्यार्थियों की सृजनात्मक और सीखने की क्षमता में वृद्धि करता है

ब्लूमिंग वेल पब्लिक स्कूल में आयोजित की गई आर्ट इंटीग्रेशन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला

सिद्धबली न्यूज डेस्क

कोटद्वार। कोटद्वार के प्रतिष्ठित ब्लूमिंग वेल पब्लिक स्कूल में सीबीएसई द्वारा “कला समेकन ” (आर्ट इंटीग्रेशन) विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।  जिसमें विद्यालय के शिक्षकों ने शिक्षा में कला के विभिन्न रूपों को टीचिंग टूल के तौर पर प्रयोग करने के गुर सीखे।

गाड़ीघाट स्तिथ विद्यालय के सभागार में आयोजित कार्यशाला का विद्यालय के संस्थापक  सुभाष चंद्र चतुर्वेदी ने शुभारंभ किया। इस कार्यशाला के रिसोर्स पर्सन विशाल अरोड़ा थे तथा ब्लूमिंग वेल पब्लिक स्कूल के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने इसमें भाग लिया।  इस कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षा में कला के विभिन्न रूपों को टीचिंग टूल के तौर पर प्रयोग करना सिखाना था। इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को विभिन्न विषय क्षेत्रों में कला को शामिल करने की रणनीतियों से लैस करना था जिससे छात्रों की सहभागिता और सीखने के परिणामों में वृद्धि हो सके।  प्रतिभागियों को कला के बेसिक ज्ञान का प्रयोग करते हुए कठिन विषयों को पढ़ाना तथा शिक्षार्थी केंद्रित वातावरण बनाना सिखाया गया।

कार्यशाला में चार सत्र थे जिनमें कला के विभिन्न आयामों पर चर्चा की गई। प्रथम सत्र में रिसोर्स पर्सन ने “कला समेकन” की अवधारणा तथा इसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि शिक्षक संगीत, नृत्य, नाटक, ड्रॉइंग , प्रदर्शन कला, आदि गतिविधियों का उपयोग करके बच्चों की शिक्षा को रोचक, रुचि जनक, मनोरंजक तथा यादगार बना सकते हैं।

द्वितीय सत्र “कला और शिक्षा के संबंध” पर था। इस सत्र में उदाहरणों के माध्यम से प्रतिभागियों को समझाया गया कि कैसे शिक्षा के विभिन्न विषयों में कला का समेकन किया जा सकता है।

तृतीय सत्र में प्रतिभागियों को व्यवहारिक गतिविधियों में शामिल किया गया l प्रतिभागियों ने समूहों में विभाजित होकर कला आधारित शिक्षण योजनाएं बनाई तथा प्रस्तुत की। अंतिम सत्र में प्रतिभागियों ने सवाल पूछे और रिसोर्स पर्सन ने उनका समाधान किया। कार्यशाला के निष्कर्ष तथा भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा की गई। कार्यशाला का निष्कर्ष यह रहा कि “कला समेकन” शिक्षा को अधिक संपूर्ण तथा प्रभावी बनाता है तथा विद्यार्थियों की सृजनात्मक और सीखने की क्षमता में वृद्धि करता है।

इस अवसर पर प्रतिभागियों ने कार्यशाला की तथा कार्यशाला की सामग्री तथा प्रस्तुति की सराहना की। यह कार्यशाला अत्यधिक सफल रही तथा प्रतिभागियों को कला के माध्यम से शिक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रेरित किया।

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