डीएवी पब्लिक स्कूल कोटद्वार में सीबीएसई के तत्वावधान में द्विदिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का हुआ आयोजन
सिद्धबली न्यूज डेस्क
कोटद्वार। बलभद्रपुर स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल कोटद्वार में सीबीएसई के तत्वावधान में द्विदिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में संदर्भदाता के रूप में डॉ. गीता शुक्ला (भूतपूर्व प्रधानाचार्या शैंफर्ड दून ) तथा अनीता सिवाच (प्रधानाचार्या वालिया ग्लोबल अकैडमी नजीबाबाद) मौजूद रहे।
इस कार्यशाला का उद्देश्य ‘अनुभवात्मक शिक्षण’ के तहत शिक्षकों को ब्लूम टैक्सनॉमी, कोल्ब थ्योरी, बहुविषयक गतिविधियों आदि के विभिन्न स्तरों की समझ प्रदान करना तथा शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में उसका प्रभावी ढंग से उपयोग करना था।

कार्यशाला के प्रथम दिवस पर मीनाक्षी भाटिया ने आगंतुक संदर्भदाताओं के उपलब्धियों के बारे में अवगत कराते हुए विद्यालय परिवार की ओर से उनका स्वागत किया तत्पश्चात प्रधानाचार्य नितिन भाटिया,संदर्भदाता अनीता सिवाच,डॉक्टर गीता शुक्ला पर्यवेक्षिका सारिका रावत के द्वारा सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया गया।
तत्पश्चात संदर्भ दाता
डॉ. गीता शुक्ला एवं अनीता सिवाच ने ब्लूम टैक्सनॉमी व कॉल्ब थ्योरी की सैद्धांतिक जानकारी प्रस्तुत की तथा उस पर आधारित समूह चर्चा, गतिविधि कार्य, प्रश्न निर्माण अभ्यास तथा उदाहरण के माध्यम से विषय को व्यवहारिक रूप से समझाया गया।

कार्यशाला के दूसरे दिन दोनों संदर्भ दाताओं ने बहु विषयक गतिविधियों (मल्टी डिसीप्लिनरी) के बारे में जानकारी प्रदान कर चर्चा करते हुए सभी विषयों जैसे- हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, गणित आदि विषयों का समेकन करते हुए शिक्षकों को समूह में विभाजित कर गतिविधियों का आयोजन किया तथा इनके माध्यम से इसे बखूबी समझाया गया।
इस कार्यशाला में विद्यालय के समस्त विषयों के शिक्षकों ने प्रतिभाग किया तथा सभी प्रशिक्षकों ने वर्तमान समय में शिक्षण की आवश्यकता अनुसार मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों, परियोजना कार्य तथा गतिविधियों को प्रस्तुत कर शिक्षक कार्य को अधिक प्रभावी व रुचिकर बनाने के कौशल विकसित करने का कार्य बखूबी निभाया।
कार्यशाला के समापन के अवसर पर पर्यवेक्षिका सारिका रावत ने आगंतुक संदर्भदाताओं का धन्यवाद किया तथा प्रधानाचार्य नितिन भाटिया ने शिक्षकों का उत्साह वर्धन करते हुए कहा कि इस तरह की कार्यशाला का उद्देश्य डीएवी के शिक्षकों की शैक्षिक उत्कृष्टता बढ़ाना है तथा इस प्रकार की कार्यशालाएँ, शिक्षकों में रचनात्मकता और शैक्षणिक क्षमता के विकास के में सहायक होती है ।उन्होंने सभी विषयों के शिक्षकों से अनुरोध किया कि वे इस कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान और कौशल का शिक्षण कार्य में प्रयोग करेंगे ।
इस अवसर पर विद्यालय के समस्त विषयों के शिक्षक उपस्थित रहे।